भारत की 5 प्रमुख फसलें और जरूरी कृषि उपकरण

भारत की 5 प्रमुख फसलें और जरूरी कृषि उपकरण

जानें किस फसल में कौनसे उपकरण व ट्रैक्टर हैं सबसे उपयुक्त

भारत एक कृषि प्रधान देश है और देश की 60 प्रतिशत जनसंख्या कृषि संबंधी कार्यों से जुड़ी हुई है। भारत की मिट्टी और जलवायु कृषि कार्यों के लिए बहुत अनुकूल है। पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी और अन्य संबंद्ध क्षेत्रों के साथ कृषि हमारे देश की कुल जीडीपी में करीब 15.87 प्रतिशत का योगदान करती है। भारत दुनिया में कई फसलों का शीर्ष उत्पादक है।, ट्रैक्टरफर्स्ट की इस पोस्ट में आपको भारत की 5 प्रमुख फसलें जैसे  गेहूं, चावल, गन्ना, कपास और सरसों की फसलों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

मौसम के अनुसार भारतीय फसलों को तीन भागों में बांट सकते हैं। इनमें रबी, खरीफ और जायद की फसल शामिल है। सबसे प्रमुख फसल के रूप में रबी की फसल शामिल है। रबी की फसलों में गेहूं, चना, सरसों, मटर, जौ, तिल, सूरजमुखी आदि शामिल है। खरीफ की फसलों में चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास, मूंगफली, जूट, गन्ना, हल्दी, उड़द आदि शामिल है। जायद फसलों में मूंग, उड़द, मूंगफली, मक्का, ग्रीष्मकालीन धान आदि को शामिल किया जाता है।

ये हैं भारत की 5 प्रमुख फसलें

1. गेहूं की खेती

गेहूं भारत की सबसे प्रमुख फसल मानी जाती है। भारत में पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं बिहार गेहूं के मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं। गेहूं का लगभग 97 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित है। गेहूं विश्व की जनसंख्या के लिए लगभग 20 प्रतिशत आहार कैलोरी की पूर्ति करता है। गेहूं में औसतन 14 प्रोटीन व 72 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। बीजाई के समय 18 डिग्री सेन्टीग्रेड, उगने के समय 12 डिग्री सेन्टीग्रेड व कटाई के समय तापमान उच्च 25 डिग्री सेन्टीग्रेड होना चाहिए। गेहूं के लिए दोमट या बलुई दोमट, बलुई, भारी चिकनी मिट्टी में सबसे अच्छी होती है। आमतौर पर दोमट मिट्टी गेहूं की सभी प्रकार की किस्मों के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। गेहूं की खेती के लिए 50-100 सेमी बारिश पर्याप्त होती है। साथ ही समय-समय पर सिंचाई करनी होती है। गेहूं की खेती में बीजाई के समय 18 डिग्री सेन्टीग्रेड, उगने के समय 12 डिग्री सेन्टीग्रेड व कटाई के समय तापमान उच्च 25 डिग्री सेन्टीग्रेड होना चाहिए।

2. चावल की खेती

भारत की प्रमुख फसलों में चावल (धान) भी शामिल है। विश्वभर में चावल की करीब 7 हजार किस्मों की खेती की जाती है। देश में प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलांगाना, पंजाब, उड़ीसा, बिहार व छत्तीसगढ़ शामिल हैं। पूरे देश में लगभग 36.95 मिलियन हेक्टेयर में धान की खेती होती है।खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान लगभग पूरे भारत में लगाई जाती है। धान की खेती की शुरुआत नर्सरी से होती है, इसलिए बीजों का अच्छा होना जरुरी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार देश के अलग-अलग राज्यों में धान की खेती होती है और हर जगह मौसम भी अलग होता है, हर जगह के हिसाब से धान की किस्में विकसित की जाती हैं, इसलिए किसानों को अपने प्रदेश के हिसाब से विकसित किस्मों की ही खेती करनी चाहिए। मई की शुरुआत से किसानों को खेती की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, ताकि मानसून आते ही धान की रोपाई कर दें।

3. भारत में गन्ने की खेती 

गन्ना भारत की प्रमुख नकदी फसल है। भारत में गन्ने का सबसे अधिक उपयोग चीनी बनाने में किया जाता है। भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। गन्ना उत्पादक प्रमुख राज्यों में उत्तर-प्रदेश, महाराष्ट, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब , हरियाणा व बिहार आदि शामिल है। सबसे ज्यादा गन्ने का उत्पादन उत्तरप्रदेश में होता है जो कि कुल उत्पादन करीब 50 प्रतिशत है। गन्ने के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट भूमि सर्वोत्तम होती है। गन्ने की अधिक पैदावार लेने के लिए सर्वोत्तम समय अक्टूबर – नवम्बर है । बसंत कालीन गन्ना फरवरी-मार्च में लगाना चाहिए ।

4. कपास की खेती

कपास भारत में महत्वपूर्ण कृषि उपज में से एक है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है। प्राकृतिक रेशा प्रदान करने वाली कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण रेशेवाली नकदी फसल है। यदि सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हैं तो कपास की फसल को मई माह में ही लगाया जा सकता है। सिंचाई की पर्याप्त उपलब्धता न होने पर मानसून की उपयुक्त वर्षा होते ही कपास लगा सकते हैं।

कपास  उगने के लिए कम से कम 16 डिग्री सेंटीग्रेट और अंकुरण के लिए आदर्श तापमान 32 से 34 डिग्री सेंटीग्रेट होना उचित है। इसकी बढ़वार के लिए 21 से 27 डिग्री तापमान चाहिए। कपास के लिए अच्छी जलधारण और जल निकास क्षमता वाली भूमि होनी चाहिए।

जहां वर्षा कम होती है, वहां इसकी खेती मटियार भूमि में की जाती है। जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हों वहां बलुई एवं बलुई दोमट मिटटी में इसकी खेती की जा सकती है। कपास उत्पादक प्रमुख राज्यों में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंधप्रदेश, कनार्टक, तमिलनाडू शामिल हैं।

5. भारत में सरसों की खेती

सरसों भारत की प्रमुख तिलहनी फसल है। सरसों की खेती सिंचित व बारानी दोनों प्रकार की भूमि में की जाती है। सरसों की खेती मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों में की जाती है। विश्व में सोयाबीन और पाम के बाद तीसरी सबसे महत्वपूर्ण तिलहनी फसल सरसों ही है।

इन दिनों सरसों की बढ़ती कीमतों ने इसे किसानों के लिए पसंदीदा फसल बना दिया है। सरसों की बुवाई का सही समय सितंबर से अक्टूबर है। इस फसल के लिए 18 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। वर्षा 50 से 75 सेमी के मध्य होनी चाहिए। सरसों की खेती के लिए शुष्क चिकनी बुलई मिट्टी, लाल, पीली और काली मिट्टी सबसे अच्छी होती है। 

जानें खेती में काम आने वाले प्रमुख उपकरण 

  • ट्रैक्टर

आधुनिक युग में ट्रैक्टर के बिना खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। ट्रैक्टर से कृषि कार्य बहुत आसान हो जाते हैं। ट्रैक्टर से खेत की जुताई, बीजों की बुवाई, सिंचाई, फसल की कटाई, ढुलाई जैसे कार्य बहुत आसानी से होते हैं। ट्रैक्टर से समय भी कम लगता है और कम से कम मानवीय श्रम की आवश्यकता होती है।

भारत में खेती के लिए महिंद्रा ट्रैक्टर , आयशर ट्रैक्टर , एस्कॉर्ट, सामे ड्यूज फॉर, सोनालिका ट्रैक्टर, मैसी फर्ग्यूसन, न्यू हॉलैंड, स्वराज ट्रैक्टर आदि कंपनियों के ट्रैक्टर कई मॉडलों और कीमत में उपलब्ध है। ट्रैक्टर के साथ अन्य कृषि यंत्रों जैसे कल्टीवेटर, रोटावेटर, थ्रेसर, जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल आदि को जोडक़र खेती के काम आसानी से किए जा सकते हैं।

खेत की जुताई के कृषि उपकरण : खेती करने से पूर्व खेत की जुताई करनी होती है। खेत की जुताई के लिए ट्रैक्टर चालित डिस्क हैरो, डक फुट कल्टीवेटर, ट्रैक्टर चलित रोटावेटर, ट्रैक्टर चलित मोल्र्ड बोर्ड हल, पावर टिलर, खूंटीदार मचाई यंत्र आदि का उपयोग किया जा सकता है। 

  • बीज बुवाई के कृषि उपकरण

बीज बुवाई के लिए तीन कतारी बीज व उर्वरक बुवाई यंत्र, पशु चलित बुवाई यंत्र, डिबलर मशीन, सीड कम फर्टीड्रिल मशीन, जीरो टिल सीड कम फर्टीड्रिल मशीन प्रमुख रूप से काम आती है।

  • सिंचाई में काम आने वाले कृषि यंत्र

फसलों की समय-समय पर सिंचाई भी बहुत जरूरी है। अगर फसलों को सही समय पर सिंचाई मिल जाए तो पैदावार कई गुना तक बढ़ जाती है। आधुनिक कृषि यंत्रों से कम पानी में ज्यादा सिंचाई की जा सकती है। सिंचाई की आधुनिक पद्धतियों में ड्रिप विधि, फव्वारा विधि, रेनगन, सोलर पंप प्रमुख है। 

  • खरपतरवार व निराई-गुड़ाई में काम आने वाले कृषि यंत्र 

अच्छी उपज की पैदावार के लिए समय-समय पर खरपतवारों को हटाना चाहिए। खेत में खरपतवारों की अधिकता से फसल को नुकसान पहुंचता है। खेत में खरपतवारों को हटाने निराई-गुड़ाई के लिए व्हील हो, पशु चालित कल्टीवेटर, स्प्रिंग टाइप कल्टीवेटर, कोनो वीडर, पैग टाइप ड्राईलंैड वीडर, पावर वीडर आदि प्रमुख कृषि उपकरण है।

  • फसल कटाई उपकर

आधुनिक कृषि उपकरणों से फसलों को कम समय व कम श्रम लागत में काटा जा सकता है। फसल कटाई के कृषि उपकरणों में मल्टी क्रॉप थ्रेसर, ब्लेड हैरो, हस्त चलित ओसाई पंखा, रीपर, कंबाइन हार्वेस्टर, स्ट्रा रीपर आदि शामिल है।

किसान भाइयों, ट्रैक्टरफर्स्ट की इस पोस्ट के माध्यम से आपको भारत की 5 प्रमुख फसलें  बताई  गई है। साथ ही बताया गया है कि आधुनिक कृषि उपकरण खेती में कैसे काम आते हैं। अगर आप ट्रैक्टर, जुताई उपकरण, बुवाई उपकरण, सिंचाई उपकरण, खरपतवार व निराई-गुड़ाई उपकरण व फसल कटाई उपकरण खरीदना चाहते हैं तो ट्रैक्टरफर्स्ट के साथ बने रहें

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