किसानों को नहीं खरीदने होंगे कृषि उपकरण, सरकार देगी ट्रैक्टर, हल, रोटावेटर व थ्रेसर

किसानों को नहीं खरीदने होंगे कृषि उपकरण, सरकार देगी ट्रैक्टर, हल, रोटावेटर व थ्रेसर

Published Date - 14 Jan 2022

अब ग्राम सहकारी समिति एक फोन पर आपके घर भेजेगी ट्रैक्टर व अन्य उपकरण

सरकार किसानों की आय दोगुना करना चाहती है। इसके लिए कई योजनाओं के माध्यम से किसानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। अब सरकार की एक योजना से उन लाखों किसानों को फायदा पहुंचेगा जिनके पास स्वयं का ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरण नहीं है। एक फोन कॉल पर किसान के घर ट्रैक्टर, हल, रोटावेटर, ट्रॉली व थ्रेसर आदि उपकरण पहुंचाए जाएंगे। किसान इन उपकरणों से अपनी खेती का काम कर सकता है। किसानों को ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए न्यूनतम किराया वसूला जाएगा। ट्रैक्टरफर्स्ट की इस पोस्ट में आपको इस खास योजना के बारे में बताया जा रहा है। तो बने रहिए ट्रैक्टरफर्स्ट के साथ।

इस प्रदेश के किसानों को मिलेगा योजना का लाभ

कृषि में आधुनिक मशीनों के उपयोग से किसानों की श्रम लागत व अन्य खर्चों की बचत होती है। लेकिन सभी किसान ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरणों को खरीदने में सक्षम नहीं होते हैं। ऐसे छोटे किसानों की मदद के लिए राजस्थान सरकार ने एक नई पहल की है। राज्य की गहलोत सरकार ने किसानों को किराए पर ट्रैक्टर, ट्रॉली, थ्रेसर, हल रोटावेटर उपलब्ध कराने के लिए गांव-गांव में कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने का निर्णय लिया है। गहलोत सरकार तीन साल के दौरान एक हजार से अधिक गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर खोलेगी।

बाजार से कम होगा कृषि उपकरणों का किराया 

राजस्थान सरकार की ओर से किसानों को जो कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, उनका किराया बाजार से बहुत कम होगा। प्रदेश के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने 13 जनवरी को जयपुर केन्द्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड के एक कार्यक्रम में जानकारी दी कि प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू किए जाएंगे। अब प्रदेश किसानों को कृषि यंत्र ट्रैक्टर, हल, रोटावेटर, थ्रेसर सहित अन्य उपकरण बाजार से कम दरों पर किराए पर उपलब्ध होंगे। अब किराए पर कृषि उपकरणों के लिए किसानों को दर-दर नहीं भटकना होगा। तीन वर्ष में 1000 कस्टम हायरिंग की स्थापना की जा रही है।

17 गावों को मिला ट्रैक्टर, अब किसान कम किराए पर ले सकेंगे

राजस्थान के 17 गावों के कस्टम हायरिंग सेंटरों को सरकार की ओर से 17 ट्रैक्टर दिए गए हैं। जयपुर जिले की चयनित 17 ग्राम सेवा सहकारी समितियों भैंसावा, बोबास, दूधली, रूंडल, धवली, नवलपुरा, कालवाड, दुर्जनियावास, धानक्या, पचार, झो. भोजपुरा, चांदमाकंला, बजरंगपुरा, सांगटेडा, हांसियावास, भैसलाना एवं शुक्लाबास में कस्टम हायरिंग सेन्टर को ट्रैक्टर उपलब्ध कराए गए हैं। समारोह के दौरान कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश, अतिरिक्त रजिस्ट्रार श्याम लाल मीणा, प्रबंध निदेशक सीसीबी इद्रराज मीणा, अधिशाषी अधिकारी अदिति गोठवाल सहित अन्य अधिकारियों ने 17 समितियों के लिए खरीदे गए ट्रैक्टरों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे पहले किसानों का स्वागत किया गया तथा उन्हें ट्रैक्टर की चाबी सौंपी गई।

साल 2021 में 302 कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना

राजस्थान सरकार का लक्ष्य 3 साल में एक हजार कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना करना है। साल 2021 में 285 ग्राम सेवा सहकारी समितियों और 17 एफपीओ में कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गई है। वहीं साल 2020 में 100 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना की गई थी। कृषि मंत्री कटारिया के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि जोत का आकार निरंतर कम होता जा रहा है। ऐसे में किसान के पास कृषि यंत्र उपलब्ध नही हो पाते है। सरकार के इस प्रयास से किसानों को स्थानीय स्तर पर कम किराया दर पर कृषि यंत्र मिल सकेंगे।

ग्राम सहकारी समितियों को मजबूत करना चाहती है सरकार

समारोह के दौरान कृषि मंत्री लाल चंद कटारिया ने जानकारी दी कि सीएम अशोक गहलोत की मंशा है कि प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियां मजबूत बने और सुदृढ़ बने। सीएम की सोच के अनुसार ही जीएसएस को सुदृढ़ करने का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान तकनीक को ध्यान में रखकर प्रदेश् के किसानों को सस्ती दरों पर जीएसएस के माध्यम से ट्रैक्टर, ट्रॉली, हल एवं रोटावेटर सहित अन्य यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। 

एक फोन पर घर बैठे आएंगे कृषि यंत्र

अब किसान भाई ग्राम सहकारी समिति के संपर्क नंबर पर कॉल करके अपनी खेती के लिए ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरण मंगवा सकेगा। अब तक बड़े शहरों में ही फोन पर चौपहिया व अन्य यात्री वाहन मंगवाने की सुविधा उपलब्ध है। यहां आपको बता दें कि केंद्र सरकार की नीतियों के अनुसार कस्टम हायरिंग सेंटर से कृषि यंत्र अब ओला-उबर की तरह फोन से मंगाए जा सकते हैं।

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