कुसुम योजना : 10 प्रतिशत पैसा देकर बंजर भूमि पर लगाएं सौर ऊर्जा संयंत्र

कुसुम योजना : 10 प्रतिशत पैसा देकर बंजर भूमि पर लगाएं सौर ऊर्जा संयंत्र

कुसुम कंपोनेंट ए योजना : आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2022 तक बढ़ाई

देश में किसानों के पास बंजर और अनुपयोगी भूमि भी होती है। अब आपकी बंजर और अनुपयोगी भूमि भी आपकी आमदनी बढ़ा सकेगी। अब आप सरकार की मदद से अपनी बंजर और अनुपयोगी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगा सकते हैं और बिजली बिलों के भारी खर्चें से बच सकते हैं। साथ ही सरकार को बिजली यूनिट बेचकर भी पैसा कमा सकते हैं। 

सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए आपको ज्यादा पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा। कुल लागत का मात्र 10 प्रतिशत पैसा लगाकर आप अपनी बंजर और अनुपयोगी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगा सकते हैं। बाकि 90 प्रतिशत पैसा सरकार और उसकी एजेंसियां उपलब्ध कराएंगी। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने कुसुम योजना के तहत सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मार्च 2022 कर दी है। ट्रैक्टरफर्स्ट की इस पोस्ट में आपको योजना की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

राजस्थान कुसुम योजना में आवेदन

कुसुम योजना का उद्देश्य किसानों के सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करना है। इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकारें देशभर के 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल और डीजल से चलने वाले सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करेगी। राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए बंजर और अनुपयोगी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना कुसुम कम्पोनेंट-ए योजना के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 मार्च 2022 कर दी है। पहले अंतिम तिथि 7 जुलाई 2021 थी। किसान अब आवेदन कर सकते हैं।

कुसुम योजना में सब्सिडी

कुसुम योजना में सौर ऊर्जा प्लांट की कुल लागत का मात्र 10 प्रतिशत ही किसान को देना होता है। कुल लागत में से 30 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 30 प्रतिशत राशि राज्य सरकार देगी। इसके अलावा किसान को लोन के रूप में 30 प्रतिशत की शेष रकम नाबार्ड व अन्य बैंकिंग संस्थाएं उपलब्ध कराएंगी। कुसुम योजना के माध्यम से किसान अपने खेतों में सोलर सिस्टम लगाकर सौर ऊर्जा से सिंचाई पंपसेट चला रहे हैं। अब उन्हें बिजली के लिए रात में जागने की समस्या से निजात मिल रही है। साथ ही किसान अतिरिक्त बिजली का उत्पादन करके आर्थिक लाभ भी कमा सकेंगे। 

राजस्थान कुसुम योजना : किसानों की सुरक्षा राशि (Security Deposit) वापस मिलेगी

कुसुम योजना के तहत राजस्थान सरकार किसानों की सुरक्षा राशि भी वापस लौटा रही है। मीडिया में प्रकाशित रिपोट्र्स के अनुसार कुसुम योजना के तहत जिन किसानों ने बंजर और अनुपयोगी भूमि पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए आवेदन किया था और बैंकों में सुरक्षा राशि (Security Deposit) जमा करवा दी थी, लेकिन किसी कारणवश उन्हें लोन नहीं मिल पाया, ऐसे किसानों को सुरक्षा राशि वापस की जा रही है। आवेदकों की ओर से जमा कराई गई एक लाख रुपए प्रति मेगावाट धरोहर राशि और 5 लाख रुपए प्रति मेगावाट परियोजना सुरक्षा राशि वापस लौटाए जाने का निर्णय लिया जा चुका है। 

राजस्थान में कुसुम कम्पोनेंट-ए योजना

केंद्र सरकार की कुुसुम योजना को राजस्थान  में संचालित करके किसानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। राजस्थान में कुसुम योजना के तहत बिजली उत्पादन का सुविधा शुरू हो गई और देशभर में राजस्थान इस योजना के कार्यान्वयन में पहले स्थान पर है। राजस्थान सरकार का प्रयास है कि बंजर या अनुपयोगी जमीन वाले किसान सरकारी मदद से सौर ऊर्जा संयंत्र लगाएं और बिजली का उत्पादन करके अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। 

राजस्थान में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का आवंटन

राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि कुुसुम योजना के तहत किसानों से 7 जुलाई 2021 तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे। आवेदन की तिथि बंद होने के बाद भी किसान योजना का लाभ उठाने के लिए लगातार संपर्क कर रहे थे। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अब योजना की अंतिम तिथि 31 मार्च 2021 तक बढ़ाई गई है। डा. अग्रवाल ने बताया कि कुसुम कंपोनेंट-ए योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 623 किसानों/विकासकर्ताओं की ओर से 722 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाओं का आवंटन किया गया है जिनमें से 7 परियोजनाओं से 9 मेगावाट विद्युत का उत्पादन शुरू हो चुका है और प्रदेश में करीब 15 अन्य परियोजनाओं पर काम हो रहा है।

कुसुम कंपोनेंट-ए योजना में लोन मिलना पहले से आसान

राजस्थान में कुसुम कंपोनेंट ए योजना के तहत लोन मिलना पहले से आसान हुआ है। आपको बता दें कि कुसुम कंपोनेंट ए योजना में किसानों/विकासकर्ताओं से क्रय की गई बिजली यूनिट का भुगतान राजस्थान विद्युत वितरण निगमों की ओर से तय समय पर किया जा रहा है। इसके अलावा विद्युत वितरण निगमों की ओर से सौर ऊर्जा उत्पादकों के पक्ष में लैटर ऑफ क्रेडिट भी जारी किया जा रहा है। इसका परिणाम सामने आने लगा है। योजना के अंतर्गत कृषकों और विकासकर्ताओं को परियोजना स्थापना के लिए बैंकों से लोन लेना आसान हो गया है।  राजस्थान विद्युत वितरण निगमों द्वारा त्रिपक्षीय अनुबंध कर खाते खोले जा रहेह हैं। ऋणदाता बैंक, किसान / विकासकर्ता और राजस्थान विद्युत वितरण निगमों के बीच एक अनुबंध किया जाता है। वितरण निगम की ओर से बिजली बिल के भुगतान की राशि में से सबसे पहले ऋणदाता बैंक की मासिक किश्त चुकाई जाती है। विद्युत निगम की ओर से एल.सी. और एस्क्रो खाते खोले जाने के कारण बैंकों का लोन सुरक्षित हो जाने से बैंकों की ओर से बिना रहन किसानों/ विकासकर्ताओं को लोन उपलब्ध कराया जाना संभव हो सकेगा।

ट्रैक्टरफर्स्ट हर माह महिंद्रा ट्रैक्टर व जॉन डियर ट्रैक्टर कंपनियों सहित अन्य कंपनियों की मासिक सेल्स रिपोर्ट प्रकाशित करता है। ट्रैक्टर्स सेल्स रिपोर्ट में ट्रैक्टर बिक्री की थोक, खुदरा, राज्यवार, जिलेवार, एचपी के अनुसार जानकारी दी जाती है। साथ ट्रैक्टरफर्स्ट आपको रिपोर्ट की मासिक सदस्यता भी प्रदान करता है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।

ट्रैक्टर इंडस्ट्री के अपडेट जानने के लिए आप हमारे हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें -  https://bit.ly/3DN8jHq

Website     -   TractorFirst.com
Instagram  -   https://bit.ly/3h0j9jE
LinkedIn    -   https://bit.ly/3BDzORV
FaceBook  -   https://bit.ly/3yF7AnV

Cancel

New Tractors

Implements

Harvesters