प्याज के भावों में तेजी : प्याज का रेट पहुंचा 3753 रुपए प्रति क्विंटल

प्याज के भावों में तेजी : प्याज का रेट पहुंचा 3753 रुपए प्रति क्विंटल

Published Date - 04 Oct 2021

महाराष्ट्र में प्याज के थोक दाम में हुई बढ़ोतरी, किसानों को हो रहा फायदा

प्याज किसानों की पिछले महीनों से मांग थी कि प्याज के दाम में बढ़ोत्तरी हो। इसके लिए महाराष्ट्र में व्यापक प्रदर्शन भी हुए। कांंदा उत्पादक किसानों की मांग थी कि प्याज की कीमतों में वृद्धि हो। फसल के कुछ महीनों बाद अब प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार कई राज्यों जैसे बिहार, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड आदि राज्यों में प्याज की कीमतें 3700 रुपए प्रति क्विंटल के पार कर गई है।

कितना है आज का प्याज का रेट?

महाराष्ट्र में प्याज का दाम रोजाना नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। जुलाई और अगस्त के मुकाबले अक्टूबर में प्याज का दाम काफी बढ़ा है। जुलाई और अगस्त में ये दाम 1500 रुपए पर प्रति क्विंटल न्यूनतम हुआ करता था। जबकि वर्तमान में पिंपलगांव मंडी में प्याज की कीमतें/ रेट 3753 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच चुका है।

प्याज के रेट में वृद्धि के क्या हैं कारण?

किसानों से अधिकांश प्याज खरीदे जा चुके हैं लेकिन सही से इसकी स्टोरेज नहीं की जा सकी। गौरतलब है कि देश में स्टोरेज के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की बहुत कमी है। महाराष्ट्र कांदा उत्पादक संगठन के अध्यक्ष भरत दिघौले बताते हैं, प्याज की रेट में वृद्धि इसलिए हुई क्योंकि व्यापक पैमाने पर प्याज बारिश से और बाढ़ से खराब हुए हैं। प्याज की कमी पड़ रही है। कई जिलों में प्याज को स्टोर करके रखा तो गया पर अत्याधुनिक सुविधाओं से वो स्टोरेज लैस नहीं था। अधिकांश गोदाम में स्टोरेज की आधुनिक सुविधा उपलब्ध नहीं है जिससे प्याज काफी सड़े हैं। इस प्रकार व्यापारियों को बहुत नुकसान हुआ है। प्याज की कमी पड़ जाने से मांग में बढ़ोतरी हुई और मांग में वृद्धि हुई तो कीमतों में भी वृद्धि हुई।

प्याज की कमी से कैसे निपटेगी सरकार?

प्याज के सड़ने, गलने से और अनियमित मौसम की वजह से देश में प्याज की कमी पड़ी है। जिससे दाम में वृद्धि हो रही है। धीरे धीरे नुकसान बढ़ता ही जा रहा है। इस वर्ष मराठवाड़ा क्षेत्र के बीड, औरंगाबाद, उस्मानाबाद, जलगांव, नासिक, धुले, सोलापुर, अहमद नगर, लातूर आदि में रखी गई प्याज नमी की वजह से सड़ गई है। क्योंकि इन क्षेत्रों में भारी बारिश हुई है। प्याज की आपूर्ति कम और मांग अधिक होने से सरकार को नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। देश के उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को 30 रुपए प्रति किलोग्राम से कम रखना बहुत जरूरी है। नई फसल के आवक से पूर्व सरकार को चाहिए कि व्यापक स्तर पर अत्याधुनिक सुविधा से लैस स्टोरेज क्षमता विकसित करें। जब तक कृषि अवसंरचना का विकास नहीं होगा तब तक यूं ही प्याजें सड़ती रहेगी और फसलों की बर्बादी होती रहेगी। इससे ना तो किसान को फायदा है, ना व्यापारी को और ना ही उपभोक्ता को। 

क्या किसानों को मिल पाएगी राहत?

बहुत कम ऐसे किसान हैं जिनके पास स्टोरेज क्षमता रहती है और वे फसलों की कीमतें बढ़ने के बाद अपना उत्पाद बेचते हैं। प्याज के थोक रेट की कीमतें बढ़ने से कुछ किसान जरूर फायदे में हो सकते हैं। लेकिन अधिकांश किसानों ने अपने फसल की बिक्री तेज आवक में ही कर दी। लेकिन जिन किसानों ने स्टोरेज किया भी उनका भी बाढ़ आदि की वजह से प्याज सड़ा है। तो प्याज की कमी से किसानों को भी फिलहाल बहुत ज्यादा फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है। प्याज की कमी होने से व्यापारी, उपभोक्ता और किसान सभी प्रभावित हैं।

पहले कितना था और अभी कितना है प्याज का भाव?

2 सितंबर को पिंपलगाव मंडी में प्याज का न्यूनतम दाम 950 रुपए वहीं मॉडल दाम 1580 रुपए था। अधिकतम दाम 1701 रुपए तक पहुंचा था। वही लासलगांव में 3 सितंबर को न्यूनतम रेट 500 और मॉडल रेट 1540 रुपए बिक रहा था।

वर्तमान में प्याज का मूल्य इस प्रकार है।

प्याज की क्वालिटी न्यूनतम भाव प्रति क्विंटल अधिकतम भाव प्रति क्विंटल
सुपर क्वालिटी प्याज का दाम 3300 रुपए 3753 रुपए
एवरेज क्वालिटी का प्याज 2600 रुपए 3000 रुपए
सुपर गोल्टा/गोल्टी प्याज 2060 रुपए 2350 रुपए
छाटन प्याज 1600 रुपए 2050 रुपए

क्या और बढ़ेगा दाम?

महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है। महाराष्ट्र में हुई बारिश और बाढ़ की वजह से पूरे देश के प्याज की कीमतों पर असर पड़ रहा है। बारिश ने फसल उत्पाद को पूरी तरह चौपट कर दिया है। बिहार और उत्तरप्रदेश में भी प्याज के दाम में बढ़ोतरी हुई है। बिहार और यूपी में क्रमशः 'यास ' और ' ताऊते ' तूफान की वजह से व्यापक नुकसान हुआ है। बिहार में प्याज का खुदरा मूल्य 40 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम तक चल रहा है। काफी प्याज सड़ जाने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में अभी प्याज की कीमतें और बढ़ेगी। दाम अगर नहीं बढ़ेगा तो फिर किसानों को और भी ज्यादा नुकसान होगा। नई फसल के आवक तक प्याज के दाम 30 से 45 रुपए तक की कीमतों की बीच रहने की आशंका जताई जा रही है।

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